प्रेमचंद ने कहानियों को चमत्कारों से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया: अरुण कैहरबा
आज भी जरूरी है प्रेमचंद का साहित्य: नरेश मीत
प्रेमचंद ने समता, स्वतंत्रता व बंधुता की आवाज बुलंद की: राजेश सैनी
रा.मॉ.सं.व.मा. विद्यालय ब्याना में कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी आयोजित
इन्द्री, 30 जुलाई
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में उनके साहित्य की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने की। वक्ता के रूप में लेखक व हिन्दी अध्यापक नरेश कुमार मीत व अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश सैनी ने प्रेमचंद के साहित्य की विशेषताओं और जरूरत पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों ने संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि भारतीय साहित्य को नई दिशा में देने में प्रेमचंद की भूमिका अहम है। जब वे लिखने लगे उससे पहले हिन्दी की कहानियां और उपन्यास राजा-रानियों की बहादुरी, चमत्कार और अंधविश्वास से भरे हुए थे। प्रेमचंद ने कहानियों को उन सब से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया। आम जन के जीवन के इर्द-गिर्द अपनी कहानियों को बुना। उनकी कहानियों में किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग, युवा व बच्चे जीवन के यथार्थ के साथ हमारे सामने आते हैं। उस समय किसान का किस तरह से शोषण हो रहा था, उसे वे सवार सेर गेहूँ, सदगति और पूस की रात सहित अनेक कहानियों के जरिये व्यक्त करते हैं। गुल्ली-डंडा, पंच परमेश्वर, बड़े भाईसाहब, दो बैलों की कथा, परीक्षा, लॉटरी आदि उनकी कहानियों में बाल व युवा मन को विशेष आकर्षित करती हैं। प्रेमचंद के साहित्य ने आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सोज़े वतन नाम की किताब को अंग्रेजों ने इस वजह से जब्त कर लिया था, क्योंकि वे लोगों में आजादी की जज़्बा जगाने वाली थी।
नरेश मीत ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों ने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया है, क्योंकि वे उनके साथ जुड़ी हुई थी। आम जन के साथ जुड़ी हुई थी। प्रेमचंद को बचपन से किताबों का चस्का लग गया था। आम जन के जीवन को उन्होंंने नजदीक से देखा था। जब वे लिखने लगे तो उसी जीवन को उन्होंने कलमबद्ध किया। उन्होंने सवा सेर गेहूं, बड़े भाई साहब, पूस की रात और कफन कहानियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज भी प्रेमचंद का साहित्य हमारे लिए जरूरी है। सभी विद्यार्थियों को अपने सिलेबस के अलावा प्रेमचंद की अन्य कहानियों को भी पढऩा चाहिए।
राजेश सैनी ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन और उनका साहित्य सभी के लिए प्रेरणादायक है। गांधी जी से प्रभावित होकर वे आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। आजादी की चेतना को विकसित करना उनका मुख्य उद्देश्य था। उनकी कहानियां समाज की विडंबनाओं, विसंगतियों, असमानताओं और शोषण को उजागर करते हुए समानता, बंधुता और न्याय की जरूरत रेखांकित करती हैं। आज भी जब उनकी रचनाओं को पढ़ा जाता है तो यही लगता है कि आज की ही कहानियां हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा विद्यार्थी और नागरिक बनने के लिए विद्यार्थियों को अध्ययन से जुडऩा चाहिए। संगोष्ठी में छात्रा ईशा, गुंजन, सोनाक्षी, अंजलि, वेदिका, राधिका, पारूल, शिवानी सैनी, हनी, गोविंद, सुधांशु, तनिश, दीपांशु व आदित्य सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय हिस्सेदारी की।

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