Sunday, June 7, 2026

डॉ. बशीर बद्र की याद में जनवादी लेखक संघ ने आयोजित किया कार्यक्रम

डॉ. बशीर बद्र की याद में जनवादी लेखक संघ ने आयोजित किया कार्यक्रम

चयनित कवियों की कविताओं के संदर्भ में भाषा के सवाल पर परिचर्चा आयोजित

कवियों ने किया रचना पाठ

करनाल, 7 जून 

न्यू रमेश नगर करनाल के संत रविदास मंदिर प्रांगण स्थित सोशल जस्टिस लाइब्रेरी एंड स्टडी सेंटर में जनवादी लेखक संघ करनाल के बैनर तले पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दो सत्र काव्यपाठ और कविता में भाषा के सवाल पर परिचर्चा की गई। संगोष्ठी में डॉ. योगेश शर्मा और हिन्दी प्राध्यापक अरुण कैहरबा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन लेखक संघ के सचिव दीपक वोहरा ने किया। डॉ. योगेश शर्मा व अरुण कैहरबा ने कविता में भाषा के सवाल पर पाँच चयनित कवियों- डॉ. कपिल भारद्वाज (अम्बाला) और हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कवि राजेश भारती, चंडीगढ़ से आए शायर सर्वेश शायर, विनोद वत्स और अमित तँवर की कविता व गज़़ल पर अपना वक्तव्य दिया। काव्य गोष्ठी में पानीपत से आए शायर इकबाल पानीपती ने तरन्नुम में अपनी गज़़ल पढक़र समां बांध दिया। पेहवा से आए हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखने वाले डॉ. देशराज, विपन कुमार तथा कबीर कोहिनूर सम्मान 2026 के लिए चयनित हुए रामेश्वर देव, इन्द्री से आए दयाल चंद जास्ट तथा दीपक वोहरा ने अपनी रचनाएं सुनाई। कार्यक्रम में जींद से आई रेणु शर्मा, शकुंतला देवी, रूपाक्षी, सक्षम वोहरा, समीक्षा वोहरा, राजकुमार मायूस व गजल की विशेष रूप से उपस्थिति रही।

योगेश शर्मा ने कविता में भाषा के सवाल पर कबीर, रैदास, मीरा, तुलसीदास को उद्धृत करते हुए अपना वक्तव्य दिया और रचनाकारों की कविता और गज़़ल पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाषा वह तत्व है, जिससे गद्य और पद्य में अंतर होता है। हर कवि की भाषा का मिजाज जुदा होता है। उन्होंने कहा कि भाषा पर वर्चस्व के लिए कोशिशें हो रही हैं। कवि अपनी कविता में नए अर्थ पैदा करके भाषा को बचाने की कोशिश करता है। अरुण कैहरबा ने कहा कि कवि भाषा के माध्यम से अपनी अनुभूति व विचारों को कविता में पिरोता है। आसान शब्दों में गहरी भाव बयां करने वाले कवियों की कविताएं पाठकों व श्रोताओं की जुबान पर सहज ही चढ़ जाती हैं। उन्होंने बशीर बद्र ही $गज़लों का जिक्र करते हुए कहा कि सहजता, सरलता और भावों की गहराई उनकी विशेषता है। 









Monday, June 1, 2026

INDIAN LANGUAGES SUMMER CAMP IN GMSSSS BIANA (KARNAL)

 सात दिवसीय भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर की हुई शुरूआत

पहले दिन विद्यार्थियों ने अभिवादन करने और अपना परिचय देने के कौशलों का किया अभ्यास

इन्द्री, 1 जून
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सात दिवसीय भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर की शुरुआत हिन्दी प्राध्यापक डॉ. सुभाष भारती ने की। शिविर की गतिविधियों के संचालन में हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा, सलिन्द्र मंढ़ाण, वाणिज्य प्राध्यापक दिनेश कुमार, सौंदर्य एवं कल्याण अनुदेशिका निशा कांबोज, अंग्रेजी अध्यापक अश्वनी कांबोज, संस्कृत अध्यापक सोमपाल शास्त्री, हिन्दी अध्यापक नरेश मीत, प्राथमिक पाठशाला प्रभारी स्नेह लता, प्राथमिक शिक्षक गोपाल सिंह का योगदान रहा।

शिविर के पहले दिन विद्यार्थियों को हिन्दी, अंग्रेजी एवं हरियाणवी में अभिवादन करने एवं अपना परिचय कराने का अभ्यास करवाया गया। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अभिवादन करते हुए अपना परिचय प्रस्तुत किया, जिसमें मनप्रीत, ओजस्वी, वंशी, यज्ञदत्त, हर्षिता, आरव सहित विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। डॉ. सुभाष भारती ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां की भाषाई विविधता भी अनूठी है। शिविर विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं से परीचित करवाने का प्रयास है। अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि दूसरों के सामने अपना परिचय रखना अभिव्यक्ति का पहला कदम है। अक्सर विद्यार्थियों को किसी के भी सामने अपन परिचय रखना होता है। उन्होंने कहा कि कुशलतापूर्वक अपना परिचय देने से विद्यार्थियों में वक्ता के गुणों का विकास होता है। अध्यापकों ने विद्यार्थियों को घर पर परिचय देने का अभ्यास करने का संदेश दिया। प्रसन्नतापूर्ण वातावरण में शिविर के पहले दिन का समापन हुआ।