माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी रचनाओं में अंग्रेजी शासन की काली करतूतों को बेनकाब किया: अरुण कैहरबा
जयंती पर मेरा परिचय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर लिया हिस्सा
जीविका, साक्षी, स्वाति, तनवी, वंशिका, राधिका, कृष्णा व ईशू रहे प्रथम चरण के विजेता
इन्द्री, 4 अप्रैल
भारत की आत्मा के नाम से विख्यात हिन्दी कवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती के उपलक्ष्य में करनाल जिला के गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मेरा परिचय विषय पर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा व सलिन्द्र मंढ़ाण के मार्गदर्शन में आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के प्रथम चरण में जीविका, साक्षी, स्वाति, तनवी, वंशिका, राधिका, कृष्णा व ईशू का चयन किया गया। चयनित विद्यार्थी प्रतियोगिता के अगले चरण में हिस्सा लेंगे।
हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन व साहित्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि चतुर्वेदी जी का जन्म 4 अप्रैल, 1889 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिला के बाबई गांव में हुआ था। एक साहित्यकार व पत्रकार के रूप में उन्होंने अपनी रचनाओं में अंग्रेजी शासन की काली करतूतों को बेनकाब किया। वे राष्ट्रवाद की प्रखर अभिव्यक्ति थे। उनकी कविता पुष्प की अभिलाषा से हमें पता चलता है कि वे अपने समय के बहुत से अन्य रचनाकारों की तरह केवल प्रकृति के सौंदर्य और उसके चित्रण तक ही सीमित नहीं थे। प्रेयसी के बालों में गूंथे जाने और देवचित्रों पर चढ़ाए जाने के प्रचलित प्रयोगों से फूल अपनी असंतुष्टि जाहिर करता है और वह ऐसे देशभक्तों व स्वतंत्रता सेनानियों के मार्ग में डाले जाने की अपील करता है। कक्षा नौवीं की पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग-1 में संकलित कविता- कैदी और कोकिला से हमें पता चलता है कि माखनलाल चतुर्वेदी केवल कलम के ही सिपाही नहीं थे, बल्कि देश की आजादी के लिए जेलों में जाने में भी पीछे नहीं थे। जेल में अंग्रेजी शासन की यातनाएं सहते हुए चतुर्वेदी जी ने यह कविता लिखी थी, जिसमें वे काल कोठरी में रहते हुए बाहर पेड़ पर बैठी कोयल से बात करते हैं और सहज रूप से अंग्रेजी शासन की क्रूरताओं को उजागर कर जाते हैं। वे इस कविता में हथकडिय़ों को ब्रिटिश राज का गहना कह कर संबोधित करते हैं। अरुण कैहरबा ने बताया कि चतुर्वेदी जी ने प्रभा, कर्मवीर व प्रताप का संपादन किया। महान स्वतंत्रता सेनानी व पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के सानिध्य में उन्होंने अपनी लेखनी को पैना किया। उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए अपना परिचय रखते हुए आत्मविश्वास, स्पष्टता और निर्भयता आदि को आत्मसात करने का आह्वान किया।
सलिन्द्र मंढ़ाण ने कहा कि अपना परिचय रखना हर एक विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है। परिचय के माध्यम से अभिव्यक्ति के रास्ते खुलते हैं। प्रभावशाली ढ़ंग से परिचय देने वाले विद्यार्थी अभिव्यक्ति के आगामी पड़ावों पर आगे चल पाते हैं। उन्होंने आगामी चरण की प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अभ्यास करने का संदेश दिया।






















































