Saturday, September 19, 2026

भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता / GMSSSS BIANA

भाषण प्रतियोगिता में याविका व नवजोत ने पाया पहला स्थान

भाषण व चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने किया अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन

इन्द्री, 17 सितंबर
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने की और संचालन हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा व अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश कुमार ने किया। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका प्राध्यापक सुभाष चन्द्र, संजीव कुमार व नरेश मीत ने निभाई। छठी से आठवीं कक्षा वर्ग की भाषण प्रतियोगिता में नवजोत ने पहला, सुहानी ने दूसरा, करिमा ने तीसरा और नव्या ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। नौवीं से 12वीं कक्षा वर्ग में याविका ने पहला और दिलप्रीत सिंह ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसी वर्ग की चित्रकला प्रतियोगिता में मनप्रीत ने पहला, गुरप्रीत ने दूसरा और देवांक ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। छठी से आठवीं कक्षा समूह में यश ने पहला, प्रतिभा ने दूसरा, माही सैनी ने तीसरा और हिमांशी वर्मा ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने कहा कि स्कूल में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम शिक्षा का अहम हिस्सा हैं। जो विद्यार्थी इस प्रकार की गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, वे अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा सीखते हैं। अरुण कैहरबा व राजेश कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों ने भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने मेरे सपनों का भारत, डिजीटल क्रांति, सामाजिक न्याय व महिला सशक्तिकरण विषयों पर भाषण दिए तथा सौर ऊर्जा, रक्तदान, स्पेस टेक्रोलोजी, क्लीन इंडिया-ग्रीन इंडिया व पौधरोपण विषयों पर अपनी पेंटिंग और पोस्टर बनाए।

स्कूल की टीम ने जिला स्तरीय प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता में पाया दूसरा स्थान-

प्रात:कालीन सभा में प्रधानाचार्य ने करनाल में जिला स्तरीय विज्ञान प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान आने पर स्कूल की टीम के सदस्य जशन, याविका, अस्मिता को सम्मानित किया। फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर खंड स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले कौशल, निबंध लेखन में तीसरा स्थान पाने वाली प्रतिभा और पेंटिंग में तीसरा स्थान स्थान प्राप्त करने वाले मनप्रीत को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापक सलिन्द्र मंढ़ाण, विवेक शर्मा, सतीश राणा, बलविन्द्र सिंह, राजेश सैनी, अनिल पाल, सन्नी चहल, मोनिका, निर्मल सिंह, निशा कांबोज, संगीता शर्मा, मीना उपस्थित रहे।


Monday, September 14, 2026

राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ब्याना में हिन्दी दिवस

तेजस्वी ने निबंध लेखन व मन्नत ने नारा लेखन में पाया प्रथम स्थान

हिन्दी दिवस पर आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं दिए पुरस्कार

इन्द्री, 14 सितंबर
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिन्दी दिवस उल्लास के वातावरण में मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने की और संचालन हिन्दी अध्यापक नरेश मीत ने किया। कार्यक्रम का संयोजन हिन्दी प्राध्यापक सुभाष चन्द्र, अरुण कुमार कैहरबा व सलिन्द्र मंढ़ाण ने किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित कक्षा छह से आठ और कक्षा नौ से बारह वर्ग के विद्यार्थियों की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हिन्दी भाषा और साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हिन्दी देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाली भाषा है। सुभाष चंद ने बेटी शीर्षक से अपनी कविता को गाकर सुनाया। सलिन्द्र मंढ़ाण ने हास्य कविता के माध्यम से हिन्दी की स्थिति को चित्रित किया। नरेश मीत ने हिन्दी भाषा की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला। अरुण कैहरबा ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

कक्षा नौ से 12 की निबंध लेखन प्रतियोगिता में 11वीं कॉमर्स की छात्रा तेजस्वी ने पहला, नौवीं-ए की छात्रा मन्नत ने दूसरा व नौवीं-सी की छात्रा अंजलि ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। नारा लेखन में 11वीं सी की मन्नत ने पहला, 12वीं-ए की छात्रा सिमरण ने दूसरा और नौवीं-ए के छात्र कौशल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में नौवीं-सी की छात्रा सोनाक्षी और कविता पाठ में तमन्ना ने पहला स्थान पाया। कक्षा छह से आठ वर्ग में चित्र देखकर कहानी लिखना प्रतियोगिता में आठवीं-ए की छात्रा करिमा ने पहला, सातवीं-ए की छात्रा जैनिश ने दूसरा और चायांश कांबोज ने तीसना स्थान पाया। कविता पाठ में अंशु पहले, इशिता दूसरे व नवजोत तीसरे स्थान पर रही। निबंध लेखन में प्रतिभा कांबोज, दिशिका व चंचल ने क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा स्थान प्राप्त किया। नारा लेखन में पृशा ने पहला स्थान प्राप्त किया।



Tuesday, September 8, 2026

LITERACY DAY CELEBRATED IN GMSSSS BIANA (KARNAL)

 साक्षरता की पूंजी से समृद्ध होता समाज: राम कुमार

स्वैच्छिक भावना पर आधारित है साक्षरता कार्यक्रम: अरुण 

अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर नव साक्षरों व स्वयंसेवी शिक्षकों को किया सम्मानित

इन्द्री, 8 सितंबर

गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर नव साक्षरों को प्रमाण-पत्र एवं स्वयंसेवी शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने की एवं संचालन उल्लास कार्यक्रम के स्कूल प्रभारी एवं हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन उल्लास कार्यक्रम के पर्येक्षक नरेश कुमार मीत व विजय कुमार ने किया। 


प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने कहा कि शिक्षा एवं साक्षरता ऐसी पूंजी है, जिससे कोई भी व्यक्ति एवं समाज आगे बढ़ता है। जो व्यक्ति साक्षरता व शिक्षा से किन्हीं कारणों से वंचित रह गए हैं, उन्हें साक्षर बनाना सबसे बड़ा कार्य है। उन्होंने कहा कि उल्लास कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में कार्य करने का मौका मिल रहा है। यह विद्यार्थियों के लिए सीखने का एक नया अवसर है। प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि वर्ष 2022 में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम शुरू हुआ है, जिसे आम तौर पर उल्लास के नाम से जाना जाता है। यह कार्यक्रम स्वैच्छिक भावना पर आधारित है। स्वैच्छिक भावना मन में आने पर हम साक्षरता में अपनी जिम्मेदारी को पहचानते हैं और अपने परिवार व आस-पास के लोगों को साक्षर बनाने का जिम्मा लेते हैं। उन्होंने कहा कि उल्लास कार्यक्रम के स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में बच्चे अपने बड़ों के नजदीक आते हैं और उन्हें पढऩा-लिखना सिखाते हुए भी कईं बातें सीखते हैं। इस तरह से सीखने-सिखाने का सिलसिला आगे बढ़ता है। 

पर्यवेक्षक नरेश मीत व विजय कुमार ने बताया कि इस समय नए निरक्षर लोगों के पंजीकरण का कार्य चल रहा है। विद्यार्थी अपने आसपास के निरक्षर लोगों को पढ़ाने का जिम्मा लें। जो नए व्यक्ति पढऩा सीखे हैं, वे अपने आसपास के निरक्षरों का पंजीकरण करवाने में सहयोग करें। उन्होंने बताया कि उल्लास की आगामी परीक्षा 20 सितंबर को आयोजित की जाएगी। पढऩा लिखना सीख रहे व्यस्कों ने स्वयंसेवी शिक्षकों को आशीर्वाद दिया। इस मौके पर प्राध्यापक बलविन्द्र सिंह, विनीत सैनी, सोमपाल, अनित पाल, मुस्कान, माही, अखिल सहित स्वयंसेवी शिक्षक व नव साक्षर मौजूद रहे।






Saturday, September 5, 2026

TEACHER DAY CELEBRATED IN GMSSSS BIANA


ज्ञान की रोशनी फैलाता है शिक्षक: राम कुमार

धूमधाम से मनाया अध्यापक दिवस

विद्यार्थियों ने निभाई अध्यापकों की भूमिका
अध्यापक दिवस समारोह को संबोधित करते हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा।

इन्द्री, 5 सितंबर 

गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सावित्रीबाई फुले सदन के नेतृत्व में अध्यापक दिवस धूमधाम से मनाया गया। विद्यार्थियों ने स्कूल का संचालन किया और अध्यापकों की भूमिका निभाते हुए शिक्षण कार्य किया। स्टाफ सदस्यों की तरफ से पहली से 12वीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों के लिए जलेबी सहित दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई। समारोह की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने की और संचालन राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक बलविन्द्र सिंह ने किया। प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा, संजीव कुमार, नरेश मीत ने अध्यापक की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। समाजसेवी महेन्द्र गोयल ने सभी अध्यापकों को सम्मानित किया।

प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी ने कहा कि अध्यापक का जीवन विद्यार्थियों व शिक्षा के लिए समर्पित होता है। अध्यापक अपने ज्ञान के जरिये समाज में शिक्षा की रोशनी फैलाने का काम करता है। अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि अध्यापक का पेशा समाज व देश के विकास में केन्द्रीय भूमिका निभाता है। डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक सहित सभी कार्यों व पेशेवरों का जन्म अध्यापक के द्वारा होता है। बलविन्द्र सिंह ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भले ही हमारे सभी कार्य आसान हो गए हैं, लेकिन एआई अध्यापक का स्थान नहीं ले सकती है। नरेश मीत ने कहा कि अध्यापक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसकी डांट भी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए होती है। संजीव कुमार ने अध्यापकों को समर्पित गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

अध्यापकों की भूमिका निभाने वाले विद्यार्थियों के साथ हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा। 

दसवीं बी कक्षा में जैसमीन, महक, रूबी, रीतिका, अनित पाल, ज्योति, अरमी, साहिबा ने अध्यापकों की भूमिका में शिक्षण कार्य करने के साथ ही गीत, कविता, प्रश्रोत्तरी, भाषण प्रस्तुत कर समां बांध दिया। इस मौके पर प्राध्यापक राजेश सैनी, सतीश राणा, संदीप कुमार, विनोद भारतीय, मुकेश कुमार, राजेश कुमार, गोपाल दास, अश्वनी भाटिया, दिनेश कुमार, नरेश मीत, मोनिका, स्वर्णजीत, निशा कांबोज, निर्मल सिंह, अश्वनी कांबोज, विनीत सैनी, सोमपाल, स्नेहलता, जितेन्द्र, सुरेन्द्र, गोपाल व कविता मौजूद रहे।














Thursday, July 30, 2026

कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी / GMSSSS BIANA (KARNAL)

प्रेमचंद ने कहानियों को चमत्कारों से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया: अरुण कैहरबा

आज भी जरूरी है प्रेमचंद का साहित्य: नरेश मीत

प्रेमचंद ने समता, स्वतंत्रता व बंधुता की आवाज बुलंद की: राजेश सैनी

रा.मॉ.सं.व.मा. विद्यालय ब्याना में कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी आयोजित

इन्द्री, 30 जुलाई
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में उनके साहित्य की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने की। वक्ता के रूप में लेखक व हिन्दी अध्यापक नरेश कुमार मीत व अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश सैनी ने प्रेमचंद के साहित्य की विशेषताओं और जरूरत पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों ने संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि भारतीय साहित्य को नई दिशा में देने में प्रेमचंद की भूमिका अहम है। जब वे लिखने लगे उससे पहले हिन्दी की कहानियां और उपन्यास राजा-रानियों की बहादुरी, चमत्कार और अंधविश्वास से भरे हुए थे। प्रेमचंद ने कहानियों को उन सब से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया। आम जन के जीवन के इर्द-गिर्द अपनी कहानियों को बुना। उनकी कहानियों में किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग, युवा व बच्चे जीवन के यथार्थ के साथ हमारे सामने आते हैं। उस समय किसान का किस तरह से शोषण हो रहा था, उसे वे सवार सेर गेहूँ, सदगति और पूस की रात सहित अनेक कहानियों के जरिये व्यक्त करते हैं। गुल्ली-डंडा, पंच परमेश्वर, बड़े भाईसाहब, दो बैलों की कथा, परीक्षा, लॉटरी आदि उनकी कहानियों में बाल व युवा मन को विशेष आकर्षित करती हैं। प्रेमचंद के साहित्य ने आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सोज़े वतन नाम की किताब को अंग्रेजों ने इस वजह से जब्त कर लिया था, क्योंकि वे लोगों में आजादी की जज़्बा जगाने वाली थी।
नरेश मीत ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों ने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया है, क्योंकि वे उनके साथ जुड़ी हुई थी। आम जन के साथ जुड़ी हुई थी। प्रेमचंद को बचपन से किताबों का चस्का लग गया था। आम जन के जीवन को उन्होंंने नजदीक से देखा था। जब वे लिखने लगे तो उसी जीवन को उन्होंने कलमबद्ध किया। उन्होंने सवा सेर गेहूं, बड़े भाई साहब, पूस की रात और कफन कहानियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज भी प्रेमचंद का साहित्य हमारे लिए जरूरी है। सभी विद्यार्थियों को अपने सिलेबस के अलावा प्रेमचंद की अन्य कहानियों को भी पढऩा चाहिए।
राजेश सैनी ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन और उनका साहित्य सभी के लिए प्रेरणादायक है। गांधी जी से प्रभावित होकर वे आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। आजादी की चेतना को विकसित करना उनका मुख्य उद्देश्य था। उनकी कहानियां समाज की विडंबनाओं, विसंगतियों, असमानताओं और शोषण को उजागर करते हुए समानता, बंधुता और न्याय की जरूरत रेखांकित करती हैं। आज भी जब उनकी रचनाओं को पढ़ा जाता है तो यही लगता है कि आज की ही कहानियां हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा विद्यार्थी और नागरिक बनने के लिए विद्यार्थियों को अध्ययन से जुडऩा चाहिए। संगोष्ठी में छात्रा ईशा, गुंजन, सोनाक्षी, अंजलि, वेदिका, राधिका, पारूल, शिवानी सैनी, हनी, गोविंद, सुधांशु, तनिश, दीपांशु व आदित्य सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय हिस्सेदारी की।    



Wednesday, July 29, 2026

ENGLISH TRAINING IN GMSSSS BIANA (KARNAL) BY DR. RANJIT FULIYA


अभ्यास भाषा सीखने का आधार: डॉ. रणजीत फुलिया

प्रसिद्ध शिक्षक ने मॉडल संस्कृति स्कूल ब्याना में अंग्रेजी भाषा का बुनियादी प्रशिक्षण दिया

विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ लिया हिस्सा

इन्द्री, 29 जुलाई
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रसिद्ध मोटीवेटर एवं शिक्षक डॉ. रणजीत सिंह फुलिया ने नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा का बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के शब्दों, उनके उपयोग और व्याकरण के बारे में जानकारी दी और उसका अभ्यास करवाया। प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संयोजन हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने किया और संचालन अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश सैनी ने किया।

डॉ. रणजीत सिंह फुलिया स्वैच्छिक रूप से गत कईं वर्षों से अनेक राज्यों व हरियाणा के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को प्रेरित करने, उनके भाषाई कौशलों और अंग्रेजी बोलने का प्रशिक्षण प्रदान करने में लगे हुए हैं। उनका गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के साथ विशेष स्नेह है। अवसर मिलते ही वे स्कूल में आते हैं और बच्चों को अंग्रेजी भाषा में पारंगत करने में योगदान देते हैं। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा आज दुनिया की सर्व प्रमुख भाषाओं में से एक है। अंग्रेजी का ज्ञान होने पर भी बच्चों को बोलने का अभ्यास नहीं होता, जिससे बच्चों को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भाषा सीखने के लिए यह जरूरी है कि बच्चे बुनियादी तत्वों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी की कठिनता का एक कारण यह भी है कि इसके बहुत से शब्द उच्चारण और लिखने में अलग हैं। लेकिन बार-बार अभ्यास से शब्दों को लिखने और उच्चारण की कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से थ्री पर्सन का भी अभ्यास करवाया। विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण में उत्साह के साथ बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और स्रोत व्यक्ति के सवालों के जवाब दिए।
अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि भाषा मानव जीवन और व्यक्तित्व का अहम अंग है। भाषा के सुनना, बोलना, पढऩा और लिखना के बुनियादी कौशलों में पारंगत होने पर व्यक्तित्व चमक उठता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी अन्य विदेशी भाषा सीखने का आधार होती है। अपनी मातृभाषा हिन्दी के ज्ञान का अंग्रेजी सीखने का आधार बनाएंगे तो यह भाषा भी मुश्किल नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि भाषा में बालने पर हमसे गलतियां होंगी, लेकिन बार-बार अभ्यास करने पर वे गलतियां दूर हो जाएंगी। राजेश सैनी ने कहा कि अंग्रेजी व हिन्दी मीडियम स्कूल होने के कारण विद्यार्थियों को अंग्रेजी का निरंतर अभ्यास करवाया जाता है। डॉ. रणजीत फुलिया जैसी शख्सियतों आ आगमन विद्यार्थियों व अध्यापकों दोनों के लिए बहुत लाभदायी है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा से बिना डरे निरंतर अभ्यास करने और अपनी भाषा को प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

विद्यार्थी सोनाक्षी, ईशा, खुशप्रीत, वेदिका, गुंजन, गोविंद, अंजलि, अदिति, राहुल ने डॉ. रणजीत फुलिया का प्रशिक्षण के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राध्यापक सतीश राणा, विनोद भारतीय, बलविन्द्र सिंह, नरेश कुमार मीत व अश्वनी कांबोज ने योगदान दिया।