Thursday, July 30, 2026

कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी / GMSSSS BIANA (KARNAL)

प्रेमचंद ने कहानियों को चमत्कारों से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया: अरुण कैहरबा

आज भी जरूरी है प्रेमचंद का साहित्य: नरेश मीत

प्रेमचंद ने समता, स्वतंत्रता व बंधुता की आवाज बुलंद की: राजेश सैनी

रा.मॉ.सं.व.मा. विद्यालय ब्याना में कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी आयोजित

इन्द्री, 30 जुलाई
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में उनके साहित्य की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने की। वक्ता के रूप में लेखक व हिन्दी अध्यापक नरेश कुमार मीत व अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश सैनी ने प्रेमचंद के साहित्य की विशेषताओं और जरूरत पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों ने संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि भारतीय साहित्य को नई दिशा में देने में प्रेमचंद की भूमिका अहम है। जब वे लिखने लगे उससे पहले हिन्दी की कहानियां और उपन्यास राजा-रानियों की बहादुरी, चमत्कार और अंधविश्वास से भरे हुए थे। प्रेमचंद ने कहानियों को उन सब से निकाल कर यथार्थ का धरातल प्रदान किया। आम जन के जीवन के इर्द-गिर्द अपनी कहानियों को बुना। उनकी कहानियों में किसान, मजदूर, महिला, बुजुर्ग, युवा व बच्चे जीवन के यथार्थ के साथ हमारे सामने आते हैं। उस समय किसान का किस तरह से शोषण हो रहा था, उसे वे सवार सेर गेहूँ, सदगति और पूस की रात सहित अनेक कहानियों के जरिये व्यक्त करते हैं। गुल्ली-डंडा, पंच परमेश्वर, बड़े भाईसाहब, दो बैलों की कथा, परीक्षा, लॉटरी आदि उनकी कहानियों में बाल व युवा मन को विशेष आकर्षित करती हैं। प्रेमचंद के साहित्य ने आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सोज़े वतन नाम की किताब को अंग्रेजों ने इस वजह से जब्त कर लिया था, क्योंकि वे लोगों में आजादी की जज़्बा जगाने वाली थी।
नरेश मीत ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों ने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया है, क्योंकि वे उनके साथ जुड़ी हुई थी। आम जन के साथ जुड़ी हुई थी। प्रेमचंद को बचपन से किताबों का चस्का लग गया था। आम जन के जीवन को उन्होंंने नजदीक से देखा था। जब वे लिखने लगे तो उसी जीवन को उन्होंने कलमबद्ध किया। उन्होंने सवा सेर गेहूं, बड़े भाई साहब, पूस की रात और कफन कहानियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज भी प्रेमचंद का साहित्य हमारे लिए जरूरी है। सभी विद्यार्थियों को अपने सिलेबस के अलावा प्रेमचंद की अन्य कहानियों को भी पढऩा चाहिए।
राजेश सैनी ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन और उनका साहित्य सभी के लिए प्रेरणादायक है। गांधी जी से प्रभावित होकर वे आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। आजादी की चेतना को विकसित करना उनका मुख्य उद्देश्य था। उनकी कहानियां समाज की विडंबनाओं, विसंगतियों, असमानताओं और शोषण को उजागर करते हुए समानता, बंधुता और न्याय की जरूरत रेखांकित करती हैं। आज भी जब उनकी रचनाओं को पढ़ा जाता है तो यही लगता है कि आज की ही कहानियां हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा विद्यार्थी और नागरिक बनने के लिए विद्यार्थियों को अध्ययन से जुडऩा चाहिए। संगोष्ठी में छात्रा ईशा, गुंजन, सोनाक्षी, अंजलि, वेदिका, राधिका, पारूल, शिवानी सैनी, हनी, गोविंद, सुधांशु, तनिश, दीपांशु व आदित्य सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय हिस्सेदारी की।    

Wednesday, July 29, 2026

ENGLISH TRAINING IN GMSSSS BIANA (KARNAL) BY DR. RANJIT FULIYA


अभ्यास भाषा सीखने का आधार: डॉ. रणजीत फुलिया

प्रसिद्ध शिक्षक ने मॉडल संस्कृति स्कूल ब्याना में अंग्रेजी भाषा का बुनियादी प्रशिक्षण दिया

विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ लिया हिस्सा

इन्द्री, 29 जुलाई
गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रसिद्ध मोटीवेटर एवं शिक्षक डॉ. रणजीत सिंह फुलिया ने नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा का बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के शब्दों, उनके उपयोग और व्याकरण के बारे में जानकारी दी और उसका अभ्यास करवाया। प्रधानाचार्य राम कुमार सैनी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संयोजन हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा ने किया और संचालन अंग्रेजी प्राध्यापक राजेश सैनी ने किया।

डॉ. रणजीत सिंह फुलिया स्वैच्छिक रूप से गत कईं वर्षों से अनेक राज्यों व हरियाणा के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को प्रेरित करने, उनके भाषाई कौशलों और अंग्रेजी बोलने का प्रशिक्षण प्रदान करने में लगे हुए हैं। उनका गांव ब्याना स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के साथ विशेष स्नेह है। अवसर मिलते ही वे स्कूल में आते हैं और बच्चों को अंग्रेजी भाषा में पारंगत करने में योगदान देते हैं। बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा आज दुनिया की सर्व प्रमुख भाषाओं में से एक है। अंग्रेजी का ज्ञान होने पर भी बच्चों को बोलने का अभ्यास नहीं होता, जिससे बच्चों को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भाषा सीखने के लिए यह जरूरी है कि बच्चे बुनियादी तत्वों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी की कठिनता का एक कारण यह भी है कि इसके बहुत से शब्द उच्चारण और लिखने में अलग हैं। लेकिन बार-बार अभ्यास से शब्दों को लिखने और उच्चारण की कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से थ्री पर्सन का भी अभ्यास करवाया। विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण में उत्साह के साथ बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और स्रोत व्यक्ति के सवालों के जवाब दिए।
अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि भाषा मानव जीवन और व्यक्तित्व का अहम अंग है। भाषा के सुनना, बोलना, पढऩा और लिखना के बुनियादी कौशलों में पारंगत होने पर व्यक्तित्व चमक उठता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी अन्य विदेशी भाषा सीखने का आधार होती है। अपनी मातृभाषा हिन्दी के ज्ञान का अंग्रेजी सीखने का आधार बनाएंगे तो यह भाषा भी मुश्किल नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि भाषा में बालने पर हमसे गलतियां होंगी, लेकिन बार-बार अभ्यास करने पर वे गलतियां दूर हो जाएंगी। राजेश सैनी ने कहा कि अंग्रेजी व हिन्दी मीडियम स्कूल होने के कारण विद्यार्थियों को अंग्रेजी का निरंतर अभ्यास करवाया जाता है। डॉ. रणजीत फुलिया जैसी शख्सियतों आ आगमन विद्यार्थियों व अध्यापकों दोनों के लिए बहुत लाभदायी है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा से बिना डरे निरंतर अभ्यास करने और अपनी भाषा को प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

विद्यार्थी सोनाक्षी, ईशा, खुशप्रीत, वेदिका, गुंजन, गोविंद, अंजलि, अदिति, राहुल ने डॉ. रणजीत फुलिया का प्रशिक्षण के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राध्यापक सतीश राणा, विनोद भारतीय, बलविन्द्र सिंह, नरेश कुमार मीत व अश्वनी कांबोज ने योगदान दिया।












Wednesday, July 22, 2026

INDRI BLOCK LEVEL CULTURAL FEST 2026 REPORT

 कलाओं को मंच देने और प्रतिभाओं को निखारने का मंच है सांस्कृतिक महोत्सव: डॉ. गुरनाम मंढ़ाण

खंड स्तरीय सांस्कृति महोत्सव में स्कूलों की टीमों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दी

मुख्य अतिथि के रूप में बीईओ ने किया शुभारंभ

इन्द्री, 22 जुलाई 

गांव भादसों स्थित सीएमईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा खंड स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में खंड की विभिन्न स्कूलों की टीमों ने कक्षा पांच से आठ और कक्षा नौ से बारह वर्ग में समूह लोक नृत्य, एकल लोक नृत्य, रागनी गायन एवं स्किट में उत्साह के साथ हिस्सा लिया।


मुख्य अतिथि के रूप में खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. गुरनाम सिंह मंढ़ाण ने दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संयोजन नोडल अधिकारी एवं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मुरादगढ़ की प्रधानाचार्या वीना गुप्ता ने किया। स्कूल प्रधानाचार्या वंदना ने आए अतिथियों पुष्प गुच्छ के साथ स्वागत किया। मंच संचालन हिन्दी प्राध्यापक अरुण कुमार कैहरबा व नरेश मीत ने किया। सांस्कृतिक महोत्सव में निर्णायक मंडल की भूमिका बीआरपी डॉ. रविन्द्र शिल्पी, नीलोखेड़ी राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के रंगमंच शिक्षक कुशल पांचाल, संगीत शिक्षक दिनेश कुमार, तरावड़ी स्कूल के वोकल इंस्ट्रक्टर अजय चौहान ने निभाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बीईओ डॉ. गुरनाम सिंह मंढ़ाण ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति बहुत समृद्ध एवं महान है। यहां पर स्थापत्य कला, सांग, रागनी, नृत्य, सांझी, लोक साहित्य ने समाज को बहुत बड़ी देन दी है। इन कलाओं को मंच देने और प्रतिभाओं को निखारने के लिए शिक्षा विभाग कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ इस तरह के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने का आह्वान किया। नोडल अधिकारी वीना गुप्ता ने स्वागत भाषण में बोलते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमें सादगी, ईमानदारी, बुजुर्गां व महिलाओं का सम्मान और प्रकृति संरक्षण की भावना जगाती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभाओं व सृजन का संगम है। प्रधानाचार्या वंदना ने कहा कि सामूहिकता की भावना जगाने में सांस्कृतिक महोत्सव एक बेहतरीन मंच है। आमंत्रित कलाकार के रूप में यश्वनी की प्रस्तुति ने रंग जमा दिया और बीईओ डॉ. गुरनाम मंढ़ाण ने उन्हें विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया। 


कार्यक्रम को सफल बनाने में बीआरपी धर्मेन्द्र सिंह, प्राध्यापक डॉ. सुरेन्द्र रंगा, पंकज भारद्वाज, संजीव कुमार, धर्मवीर लठवाल, देवेन्द्र देवा, जगदीश कुमार, एलए राजेश कुमार, प्रवीन कुमार, मान सिंह, अमित कुमार, विनय अत्री, सुशील कुमार, रूपिन्द्र कौर, यश्वनी, अनीता, मनिन्द्र सिंह, एबीआरसी ललतेश, अनुपमा, निशा व नीतू सहित अनेक अध्यापकों ने योगदान किया।  

यह रहे परिणाम-

कक्षा 9वीं से 12वीं वर्ग 

समूह नृत्य में राजकीय स्कूल खेड़ा की टीम ने पहला, मुरादगढ़ स्कूल ने दूसरा, कन्या स्कूल इन्द्री की टीम ने तीसरा और भादसों स्कूल की टीम ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। स्किट में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भादसों की टीम ने पहला स्थान प्राप्त किया। रागनी में पीएम श्री स्कूल इन्द्री के अमनदीप ने पहला स्थान प्राप्त किया। एकल नृत्य में कलसौरा की टीम ने पहला, बीबीपुर जाटान ने दूसरा, राजकीय स्कूल मुरादगढ़ की टीम ने तीसरा और कन्या स्कूल इन्द्री की टीम ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया।

कक्षा 5वीं से 8वीं वर्ग के परिणाम-

लघु नाटिका में पीएम श्री स्कूल इन्द्री की टीम ने पहला, भादसों स्कूल ने दूसरा, खानपुर स्कूल ने तीसरा, डबकौली कलां की टीम ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। रागनी में पीएम श्री स्कूल इन्द्री ने पहला, कन्या स्कूल इन्द्री ने दूसरा और प्राथमिक स्कूल टपरियों ने तीसरा स्थान पाया। समूह नृत्य में खानपुर स्कूल ने पहला, मुरादगढ़ स्कूल ने दूसरा और भादसों स्कूल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। एकल नृत्य में राजकीय स्कूल खानपुर ने प्रथम, गढ़ी गुजरान स्कूल ने दूसरा, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इन्द्री ने तीसरा और भादसों स्कूल ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। 































Sunday, June 7, 2026

डॉ. बशीर बद्र की याद में जनवादी लेखक संघ ने आयोजित किया कार्यक्रम

डॉ. बशीर बद्र की याद में जनवादी लेखक संघ ने आयोजित किया कार्यक्रम

चयनित कवियों की कविताओं के संदर्भ में भाषा के सवाल पर परिचर्चा आयोजित

कवियों ने किया रचना पाठ

करनाल, 7 जून 

न्यू रमेश नगर करनाल के संत रविदास मंदिर प्रांगण स्थित सोशल जस्टिस लाइब्रेरी एंड स्टडी सेंटर में जनवादी लेखक संघ करनाल के बैनर तले पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दो सत्र काव्यपाठ और कविता में भाषा के सवाल पर परिचर्चा की गई। संगोष्ठी में डॉ. योगेश शर्मा और हिन्दी प्राध्यापक अरुण कैहरबा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन लेखक संघ के सचिव दीपक वोहरा ने किया। डॉ. योगेश शर्मा व अरुण कैहरबा ने कविता में भाषा के सवाल पर पाँच चयनित कवियों- डॉ. कपिल भारद्वाज (अम्बाला) और हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कवि राजेश भारती, चंडीगढ़ से आए शायर सर्वेश शायर, विनोद वत्स और अमित तँवर की कविता व गज़़ल पर अपना वक्तव्य दिया। काव्य गोष्ठी में पानीपत से आए शायर इकबाल पानीपती ने तरन्नुम में अपनी गज़़ल पढक़र समां बांध दिया। पेहवा से आए हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखने वाले डॉ. देशराज, विपन कुमार तथा कबीर कोहिनूर सम्मान 2026 के लिए चयनित हुए रामेश्वर देव, इन्द्री से आए दयाल चंद जास्ट तथा दीपक वोहरा ने अपनी रचनाएं सुनाई। कार्यक्रम में जींद से आई रेणु शर्मा, शकुंतला देवी, रूपाक्षी, सक्षम वोहरा, समीक्षा वोहरा, राजकुमार मायूस व गजल की विशेष रूप से उपस्थिति रही।

योगेश शर्मा ने कविता में भाषा के सवाल पर कबीर, रैदास, मीरा, तुलसीदास को उद्धृत करते हुए अपना वक्तव्य दिया और रचनाकारों की कविता और गज़़ल पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाषा वह तत्व है, जिससे गद्य और पद्य में अंतर होता है। हर कवि की भाषा का मिजाज जुदा होता है। उन्होंने कहा कि भाषा पर वर्चस्व के लिए कोशिशें हो रही हैं। कवि अपनी कविता में नए अर्थ पैदा करके भाषा को बचाने की कोशिश करता है। अरुण कैहरबा ने कहा कि कवि भाषा के माध्यम से अपनी अनुभूति व विचारों को कविता में पिरोता है। आसान शब्दों में गहरी भाव बयां करने वाले कवियों की कविताएं पाठकों व श्रोताओं की जुबान पर सहज ही चढ़ जाती हैं। उन्होंने बशीर बद्र ही $गज़लों का जिक्र करते हुए कहा कि सहजता, सरलता और भावों की गहराई उनकी विशेषता है।