सत्यभूमि में साहू जी महाराज अखाड़ा की हुई शुरूआत
सावित्रीबाई फुले की जयंती पर स्वास्थ्य को लेकर नई पहल
बुद्धिजीवियों व शिक्षकों ने की जोर आजमाईश
कुरुक्षेत्र, 3 जनवरी
गांव ईशरगढ़ स्थित सत्यभूमि में पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर साहू जी महाराज अखाड़े की शुरूआत की गई। देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष सैनी व अखाड़े के संयोजक जसबीर सिंह सहित पास-दूर से आए बुद्धिजीवियों और शिक्षकों ने अखाड़े की शुरूआत की। अखाड़े की शुरूआत पर आव्या और इशिका के बीच पहली जोर-आजमाईश हुई, जिसमें दोनों का मुकाबला बराबरी पर छूटा। सामाजिक कार्यकर्ता जस रंधावा ने अखाड़े की गतिविधियों के लिए प्रतिमाह 11सौ रूपये देने की घोषणा की, जिसका सभी ने सहर्ष स्वागत किया।
डॉ. सुभाष सैनी ने कहा कि अखाड़ा खेलों की लोक परंपरा का हिस्सा है। अखाड़ा एक पवित्र स्थान होता है, जहां पर सभी जूते आदि उतार कर प्रवेश करते हैं। अखाड़े में आने वाले समय में दंगल का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखना सबकी जिम्मेदारी है। शरीर को तंदरूस्त व स्वस्थ रखने के लिए अनेक प्रकार के ढ़ांचे बनाने पड़ते हैं। अखाड़ा उनमें से एक है। साहू जी महाराज कोल्हापुर के राजा होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए अनेक कार्य किए। अपने कार्यकाल में उन्होंने अपने राज्य में अनेक अखाड़े खुलवाए थे। कोल्हापुर में आज भी वह अखाड़ा है, जिसमें पांच हजार लोग बैठ कर दंगल देख सकते हैं।
संयोजक जसबीर सिंह ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर यह शुभ शुरूआत हो रही है। सावित्रीबाई फुले और साहू जी महाराज दोनों शख्सियतें सामाजिक संघर्षों से जुड़ी हुई हैं। जिनसे पूरा समाज प्रेरणा लेता है। उनके संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए अखाड़ा खोला गया है। अखाड़ा संघर्ष का एक स्थान है। अखाड़े के जरिये समाज को स्वास्थ्य की राह पर लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। उत्तर प्रदेश से आए विकास कुमार ने भी इस मौके पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस मौके पर तेलू राम, डॉ. सुनील थुआ, अरुण कुमार कैहरबा, डॉ. धर्मेन्द्र फुले, नरेश सैनी, तेजिन्द्र, परमजीत सिंह, तरसेम लाल, कपिल भारद्वाज, नरेश दहिया, गौरव, योगेश शर्मा, बीर सिंह, मनीष सिद्धू, शशी भूषण, विकास, विनोद चौहान, सुशील कुमार, भारत भूषण भारद्वाज सहित अनेक लोगों ने अखाड़े में कस्सी चलाई और मुगदर चलाकार जोर आजमाईश की।
















