छठे अंबाला साहित्य सम्मेलन में हुआ लेखकों का संगम
समीक्षकों ने देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं की किताबों की समीक्षाएं प्रस्तुत की
अरुण कुमार कैहरबा
हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित एसडी कॉलेज में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के तत्वावधान में प्रो. वीर सेन विनय मल्होत्रा ट्रस्ट द्वारा छठे अंबाला साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के लेखक एक मंच पर एकत्रित हुए और देश-विदेश के लेखकों की पुस्तकों पर चर्चा की। सम्मेलन का उद्घाटन अंबाला छावनी के एसडीएम डॉ. विनेश कुमार ने किया। उन्होंने समारोह में ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा के काव्य-संग्रह ‘बहुवर्णी’ तथा यूनिक पब्लिशर्स कुरुक्षेत्र से प्रकाशित हुई हरियाणवी शायर कर्मचंद केसर की हरियाणवी गज़लों पर आधारित पुस्तक ‘गुल्लर के फूल’ का लोकार्पण किया। ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा, उपाध्यक्ष डॉ. केएल सहगल, कोषाध्यक्ष डॉ. नीना मल्होत्रा, ट्रस्टी दीपक जैन ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
डॉ. विनय मल्होत्रा ने ट्रस्ट की गतिविधियों तथा सम्मेलन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा और वरिष्ठ साहित्यकारों को एक मंच पर लाना और एक वर्ष के दौरान आने वाली किताबों पर चर्चा करते हुए उनका परिचय प्रस्तुत करना सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि युवा साहित्यकारों को इस तरह के कार्यक्रमों से सीखने और प्रेरणा लेने का मौका मिलता है। उन्होंने अपने नव प्रकाशित काव्य-संग्रह की एक कविता पढ़ कर सुनाई।
साहित्य सम्मेलन कुल चार सत्रों में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में जकार्ता (इंडोनेशिया) समेत विभिन्न स्थानों से आए 35 लेखकों की वर्ष 2025 में हिंदी, पंजाबी, पुआधी व अंग्रेज़ी भाषाओं में प्रकाशित उपन्यास, काव्य संग्रह, कहानी संग्रह, लघु कथा संग्रह, विदेश भ्रमण तथा संस्मरण, आत्मकथा, हरियाणवी गज़़लें, हरियाणवी महिलाओं की गौरव गाथा, भारतीय राजनीति, विचारधारा, भारतीय कूटनीति व इतिहास के विषयों एवं विभिन्न विधाओं पर आधारित पुस्तकों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में जकार्ता (इंडोनेशिया) की सोनिया ओबराय, चंडीगढ़ की कुदरत खोसला, करनाल के डॉ. अशोक भाटिया, अरुण कुमार कैहरबा, राधेश्याम भारतीय, डॉ. ज्ञानी देवी, रोजलीन, नारायणगढ़ के डॉ. जगदीप सिंह, सोनीपत की गीता सैनी, कमलेश मलिक एवं अशोक बैरागी, पलवल के कुमार दत्त कुमर, पंजाब के पटियाला से सुशील कुमार आज़ाद, यमुनानगर के डॉ. दुर्गा प्रसाद, अंबाला के जयपाल, डॉ. बलवान सिंह, प्रदीप शर्मा, डॉ. अनुपम आर्य, डॉ. भारती बंधु, जयपाल, डॉ. नीना मल्होत्रा, ओम बनमाली, बलराज सैनी आदि लेखकों की पुस्तकों पर चर्चा हुई।
हिसार के लेखक अशोक गर्ग, मनोज छाबड़ा व राज कुमार जांगड़ा द्वारा 41 महिला सफाई कर्मचारियों के जीवन अनुभवों पर आधारित पुस्तक- जहर जो हमने पीया पर अरुण कुमार कैहरबा ने चर्चा की। डॉ. अशोक भाटिया द्वारा संपादित किताब कथा-समय दस्तावेजी लघुकथाएँ खंड-2 की पर राधेश्याम भारतीय ने चर्चा की। जयपाल के काव्य-संग्रह बंद दरवाजे पर डॉ. अशोक भाटिया ने चर्चा की। अरुण कैहरबा के काव्य-संग्रह- सुबह का इंतजार पर जयपाल ने समीक्षा प्रस्तुत की। पानीपत के एसपी बंसल की आत्मकथा- मुसाफिर ना थका, ना हारा पर दिनेश कुमार ने चर्चा की।
सम्मेलन के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एसडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देशबंधु ने सभी लेखकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें ट्रस्ट की ओर से स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रतन सिंह ढि़ल्लो ने अपने विचार व्यक्त किए। कॉन्क्लेव के दौरान यूनिक पब्लिशर्स कुरुक्षेत्र के प्रबंधक डॉ. विकास साल्याण द्वारा अपनी किताबों की प्रदर्शनी आयोजित की गई।
एआई पुस्तकों का विकल्प नहीं बन सकती: डॉ. विनेश कुमार
छठे अंबाला लिटरेरी कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में अंबाला शहर के एस.डी.एम. डॉ. विनेश कुमार ने कहा कि ए.आई. कभी पुस्तकों का विकल्प नहीं बन सकती, क्योंकि जैसी कल्पनाशीलता मानव के दिमाग में है, वैसी एआई जनरेट नहीं हो सकती। चाहे कविता, कहानी, गज़़ल या उपन्यास हो — एक लेखक ही लिख सकता है, एआई नहीं। एआई केवल पहले से उपलब्ध डाटा को री-जेनरेट करती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के विद्यार्थी होने के बावजूद लोक प्रशासन व राजनीति विज्ञान में उनकी रूचि है। अपने जीवन की 26 साल की शिक्षा में उन्हें भारतीय संविधान और उनके मूल्यों ने सबसे अधिक प्रभावित किया है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए समाज बच्चों को सामाजिक न्याय व समता आदि के बारे में समझा नहीं पा रहा है। सोशल मीडिया पे लोग आपस में एक दूसरे के लिंग, जाति, वंश, धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्र व बोली-भाषा आदि के आधार पर नीचा दिखाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से समझ पैदा नहीं होगी। समझ पैदा होगी किताबें पढऩे से। लेकिन आज की पीढ़ी सोशल मीडिया पर आई सब चीजों को सत्य मान कर चल रही है। डॉ. विनेश ने कहा कि उस सोशल मीडिया का कोई फायदा नहीं जो हमें असामाजिक बना दे। उन्होंने कहा कि लिटरेरी कॉन्क्लेव के माध्यम से सोशल मीडिया के जमाने में किताबें पढऩा, किताबें रखना और लोगों को को प्रेरित करना बहुत बड़ा काम है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को ये समझाना पड़ेगा कि जो चीजें पुस्तकालय में उपलब्ध हंै वो इंटरनेट पे उपलब्ध नहीं हो सकती।
-अरुण कुमार कैहरबा
हिन्दी प्राध्यापक व लेखक
वार्ड नं.-4, रामलीला मैदान, इन्द्री,
जिला-करनाल, हरियाणा
मो.नं.-9466220145






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